तुम समन्दर से भी गहरे
मैं नदिया की उथली लहरे,
मेल कहाँ है तेरा मेरा
फिर क्यू मेरा दमन छेड़े |
जुदा जुदा तासीर हमारी
कंहाँ जुड़े तकदीर हमारी,
हम दो अलग लोक के वासी
क्यूँ कर चल दूँ संग मैं तेरे|
जीत सदा तेरी ही जिद है
हार भला मुझको क्यूँ प्यारी
फिर भी मिले दो दिल बेरागी
जैसे मिले नित साँझ सवेरे|
मैं नदिया की उथली लहरे,
मेल कहाँ है तेरा मेरा
फिर क्यू मेरा दमन छेड़े |
जुदा जुदा तासीर हमारी
कंहाँ जुड़े तकदीर हमारी,
हम दो अलग लोक के वासी
क्यूँ कर चल दूँ संग मैं तेरे|
जीत सदा तेरी ही जिद है
हार भला मुझको क्यूँ प्यारी
फिर भी मिले दो दिल बेरागी
जैसे मिले नित साँझ सवेरे|
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