बारिशों के मौसम में दिल ये क्यूँ मचलते है,
गलबहियां पाने को प्यार की तड़पते है,
किसकी शरारत है ये जो तन मन सुलगते हैं
बारिशों के मौसम........
जब भी घिर आती हैं काली घटाएं
मन को जलाती हैं भीगी हवाएं
बर्फ सी लहराती है हम सिहरने लगते हैं
बारिशों के मौसम..........
जब बहने लगती है पुरबा पुरवाई
तमन्ना मचलती है ले ले अंगड़ाई
आग सी दहकती है हम पिघलने लगते हैं
बारिशों के मौसम..............
साथ बीते लम्हों की झीनी झीनी परछाई
आँखों में छलकती है चाहत की गहराई
सांसे थम सी जाती है हम बहकने लगते हैं
बारिशों के मौसम.........
भीगे भीगे आलम में यादों के दीप जलते हैं
मदहोश पलकों पर स्वप्न कई सजते हैं
यादें गहराती हैं आँखे छलकने लगती हैं
बारिशों के मौसम........
गलबहियां पाने को प्यार की तड़पते है,
किसकी शरारत है ये जो तन मन सुलगते हैं
बारिशों के मौसम........
जब भी घिर आती हैं काली घटाएं
मन को जलाती हैं भीगी हवाएं
बर्फ सी लहराती है हम सिहरने लगते हैं
बारिशों के मौसम..........
जब बहने लगती है पुरबा पुरवाई
तमन्ना मचलती है ले ले अंगड़ाई
आग सी दहकती है हम पिघलने लगते हैं
बारिशों के मौसम..............
साथ बीते लम्हों की झीनी झीनी परछाई
आँखों में छलकती है चाहत की गहराई
सांसे थम सी जाती है हम बहकने लगते हैं
बारिशों के मौसम.........
भीगे भीगे आलम में यादों के दीप जलते हैं
मदहोश पलकों पर स्वप्न कई सजते हैं
यादें गहराती हैं आँखे छलकने लगती हैं
बारिशों के मौसम........
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